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दिल्ली पुलिस नेअवैध हथियार और कारतूस फैक्टरी का किया पर्दाफाश

मुरादाबाद: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े हथियार तस्करी और अवैध कारतूस निर्माण गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक के अनुसार, पूर्वी रेंज में तैनात एसीपी कैलाश बिष्ट की टीम को 22 सितंबर को सूचना मिली कि फाजिल नामक तस्कर दिल्ली के गाजीपुर फ्लाईओवर के पास हथियारों की खेप पहुंचाएगा। पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर फाजिल को पकड़ लिया, जिसके पास से चार सिंगल-शॉट पिस्तौल और .315 बोर के 166 कारतूस बरामद किए गए।

फाजिल से पूछताछ के बाद पुलिस ने रामपुर में छापा मारकर जमीर को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से .315 बोर के 20 कारतूस बरामद हुए। जांच में पता चला कि जमीर यह कारतूस मुरादाबाद के कटघर क्षेत्र निवासी इलियास से खरीदता था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बुधवार की सुबह इलियास को भी गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से दो अर्ध-स्वचालित पिस्तौल और एक सिंगल-शॉट पिस्तौल बरामद हुए।

इलियास अपने घर के पास ही अवैध हथियार और कारतूस बनाने की फैक्टरी चला रहा था। कटघर पुलिस की मदद से फैक्टरी में छापा मारकर पुलिस ने लेथ मशीन, ग्राइंडिंग मशीन, कारतूस बनाने के उपकरण, 354 गोलियों के लीड, 350 खोल, बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की। पुलिस के मुताबिक, बरामद कच्चे माल से लगभग 1000 कारतूस बनाए जा सकते थे।

जानकारी के अनुसार, फाजिल अनपढ़ है और खेती करता है। करीब पांच-छह साल पहले रिश्तेदारों के माध्यम से उसने जमीर से संपर्क किया और अवैध हथियारों की सप्लाई शुरू की। जमीर ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और छोटी-मोटी नौकरियों के माध्यम से परिवार का पालन-पोषण करता रहा। लगभग पांच-छह साल पहले उसने इलियास से अवैध हथियार खरीदकर आगे सप्लाई करना शुरू किया।

कटघर थाने का हिस्ट्रीशीटर इलियास भी पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है और पिता के साथ पीतल के काम में लगा। उसने स्थानीय कारीगरों से गोलाबारूद बनाने की तकनीक सीखकर करीब 20 साल पहले अवैध धंधे में शामिल हो गया। इलियास पहले मुरादाबाद के मुगलपुरा थाना में आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार हो चुका था। पुलिस के अनुसार, उसने पुलिस से बचने के लिए किराए का मकान लिया और वहां अवैध कारतूस और हथियार बनाने की फैक्टरी चलाता रहा।

एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि इलियास के खिलाफ कई थानों में केस दर्ज हैं और गैंगस्टर के तहत भी जेल जा चुका है। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के दौरान कटघर पुलिस को भनक नहीं लगी। कटघर पुलिस हिस्ट्रीशीटर का सत्यापन करती रही, लेकिन उसकी गतिविधियों पर निगरानी नहीं रख पाई। इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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