मुजफ्फरपुर के डॉ. विजय पाठक ‘प्रसून’ को मिला राष्ट्रीय साहित्य सम्मान
मुजफ्फरपुर/बिहार : साहित्य की साधना जब प्रतिभा, संवेदना और सृजनशीलता का सुंदर संगम बन जाती है, तब उसकी सुगंध गांव की पगडंडियों से निकलकर राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचती है। ऐसा ही गौरवपूर्ण अवसर मुजफ्फरपुर जिले के मुरौल प्रखंड अंतर्गत रैनी गांव के लिए आया, जब वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक समारोह में सम्मानित किया गया।
काशी हिंदी विद्यापीठ, वाराणसी के सौजन्य से एस.एस. पब्लिक स्कूल, कृष्ण नगर, लखनऊ में गीत ऋषि स्वर्गीय गोपाल दास नीरज स्मृति सम्मान 2026 सह काव्य-गीत-गजल राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इसी गरिमामय अवसर पर डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ को काशी हिंदी विद्यापीठ द्वारा ‘विद्या वाचस्पति’ की उपाधि एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें ‘गीत ऋषि स्वर्गीय गोपाल दास नीरज स्मृति साहित्य सम्मान 2026’ से भी अलंकृत किया गया।
यह सम्मान काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. सुखमंगल सिंह, कुलसचिव श्री इंद्रजीत कुमार ‘निर्भीक’, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय तथा वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के पूर्व कुलपति एवं वर्तमान में आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार तिवारी द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ साहित्य और चिकित्सा-दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनकी लेखनी जीवन के विविध अनुभवों, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को शब्दों का ऐसा स्वर देती है, जिसमें साहित्यिक गरिमा के साथ मानवीय अनुभूतियों की गहनता भी दिखाई देती है। राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजनों में उनकी रचनात्मक उपस्थिति और साहित्यिक प्रस्तुति ने उन्हें पाठकों एवं साहित्यप्रेमियों के बीच विशेष पहचान दिलाई है।
बेटी कोमल कुमारी की साहित्यिक प्रतिभा को भी मिला सम्मान
इस समारोह का सबसे आत्मीय और भावुक पक्ष तब सामने आया, जब डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ की स्नेहिल पुत्री कोमल कुमारी, जो हिंदी शिक्षिका हैं, की साहित्यिक रचना का भी समारोह में अवलोकन किया गया। उनकी रचना की सराहना करते हुए संस्था की ओर से उन्हें भी ‘गीत ऋषि स्वर्गीय गोपाल दास नीरज स्मृति साहित्य सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया।
एक ही परिवार की दो पीढ़ियों में साहित्यिक चेतना और सृजनशीलता का यह सुंदर संगम समारोह के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बेटी की साहित्यिक प्रतिभा को अपने सामने राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होते देखना डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ के लिए निश्चय ही अत्यंत गर्व और आत्मिक प्रसन्नता का क्षण रहा।
रैनी जैसे साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय साहित्यिक मंच तक पहुंचना केवल डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके गांव और क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। उनकी यह उपलब्धि इस विश्वास को और मजबूत करती है कि प्रतिभा यदि निरंतर साधना, समर्पण और सृजन के पथ पर चलती रहे, तो गांव की मिट्टी से उठी आवाज भी राष्ट्रीय फलक पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकती है।
डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ की इस साहित्यिक उपलब्धि से उनके शुभचिंतकों, साहित्यप्रेमियों और रैनी गांव में हर्ष एवं गर्व का वातावरण है। मां सरस्वती की साधना में रत इस साहित्य-साधक की उपलब्धि को क्षेत्रवासियों ने अपनी सामूहिक खुशी और गौरव के रूप में देखा है।
, रिपोर्ट -कुमार संदीप