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धराली आपदा के बाद गंगोत्री मार्ग नौ दिन से बंद

उत्तरकाशी : धराली आपदा के बाद गंगोत्री जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग नौ दिनों से पूरी तरह बंद है और मलबा हटाने के प्रयास दिन-रात जारी हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पाण्डेय के अनुसार, सीमा सड़क संगठन के साथ मिलकर डबरानी, सोनगाड़, लोहारीनाग, हर्षिल और धराली में मलबा हटाने और भू-धंसाव से प्रभावित सड़कों को बहाल करने का काम लगातार किया जा रहा है। हालांकि, इन इलाकों में भारी मात्रा में मलबा आने और सड़कों के टूटने से कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्या, जो वर्तमान में धराली में कैंप कर रहे हैं, ने बताया कि गंगोत्री तक मार्ग खोलने में तीन से चार दिन और लगेंगे। आपदा के बाद से राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह मलबा आने और सड़कों के बहने से आवागमन पूरी तरह ठप है। नेताला में फिलहाल रास्ता खुला है, लेकिन यहां लगातार मलबा गिरने से जोखिम बना हुआ है। ऐसे में डबरानी, सोनगाड़, लोहारीनाग, हर्षिल और धराली में फंसे आपदा प्रभावितों तक दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं हेलीकॉप्टर से पहुंचाई जा रही हैं।

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा सड़क संगठन के प्रयासों से अगले कुछ दिनों में गंगोत्री तक वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकेगी, लेकिन सड़कों की बेहद खराब स्थिति को देखते हुए अभी यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने जानकारी दी कि गंगोत्री मार्ग को छोड़कर बदरीनाथ, केदारनाथ और यमुनोत्री के रास्ते वर्तमान में खुले हैं। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पागलनाला के पास बार-बार मलबा गिरने की समस्या बनी हुई है, हालांकि इसे हटाकर मार्ग चालू रखा जा रहा है।

धराली में आपदा के बाद से लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। पिछले नौ दिनों से डॉग स्क्वाड, थर्मल कैमरा और जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल कर मलबे में दबे लोगों का पता लगाया जा रहा है, लेकिन अब तक सिर्फ एक शव बरामद हुआ है। एसडीआरएफ के आईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि प्रतिदिन बैठक कर यह तय किया जाता है कि किस तरह से लापता लोगों की तलाश आगे बढ़ाई जाए। सड़कें बंद होने के कारण मलबे को पूरी तरह हटाना भी मुश्किल है, जिससे राहत एवं बचाव कार्य की गति प्रभावित हो रही है। राहत दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हटाए गए मलबे को कहां ले जाया जाए, क्योंकि चारों ओर मलबा और टूट-फूट का ढेर फैला हुआ है।

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