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राज्यपाल गुरमीत सिंह ने दून विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को किया सम्मानित

देहरादून : दून विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक दायित्व के संदेश के साथ गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्रनिर्माता तैयार करने का सशक्त मंच होता है।

दीक्षांत समारोह में वर्ष 2024 के कुल 738 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 484 स्नातक, 241 स्नातकोत्तर और 13 शोधार्थी (पीएचडी) शामिल रहे। विभिन्न स्कूलों और विभागों से आए विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में उपाधि ग्रहण कर इस उपलब्धि को अपने जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा तेजी से बदलती दुनिया में ज्ञान, तकनीक और संवेदनशीलता का संतुलन बनाकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल करियर निर्माण नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी है। उन्होंने छात्रों से नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डिजाइन, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन, भाषा, प्रबंधन, मीडिया एवं संचार अध्ययन, भौतिक विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, जैविक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डॉ. नित्यानंद हिमालयी शोध एवं अध्ययन केंद्र के विद्यार्थियों को उपाधियां दी गईं। समारोह में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और शोध गतिविधियों को भी रेखांकित किया गया।

साहस और सामाजिक जिम्मेदारी का सम्मान

दीक्षांत समारोह का एक विशेष क्षण तब आया, जब विश्वविद्यालय के छात्र अग्रांशु ग्रोवर को उनके साहसिक कार्य के लिए सम्मानित किया गया। अग्रांशु ने अपने नागरिक कर्तव्य का परिचय देते हुए वरिष्ठ नागरिकों से बैग छीनकर भाग रहे लुटेरों का सामना किया था। राज्यपाल ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे छात्र समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सच्चे वाहक होते हैं।

एआई विशेषज्ञ का छात्रों को मार्गदर्शन

समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन उपस्थित रहे। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए छात्रों से कहा कि भविष्य की दुनिया में तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, शोध और वैश्विक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रो. गणेश रामकृष्णन ने कहा कि एआई केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन व्यवस्था को बदलने का माध्यम है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए करें।

समारोह का समापन राष्ट्र निर्माण, ज्ञान के विस्तार और सामाजिक दायित्व की भावना के साथ हुआ। दीक्षांत समारोह ने न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता का उत्सव मनाया, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और नवाचारी नागरिक बनने का संदेश भी दिया।

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