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नीतीश सरकार का बड़ा फैसला: रसोइयों और अनुदेशकों का मानदेय दोगुना

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय की घोषणा की, जिसमें भविष्य की शिक्षक भर्तियों में राज्य के निवासियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि 2005 में सरकार बनने के बाद से शिक्षा में सुधार के लिए लगातार काम किया गया है और बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्तियाँ की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह नियमों में आवश्यक संशोधन करके यह सुनिश्चित करे कि आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में बिहार के अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाए। यह प्रावधान आगामी टीआरई-4 परीक्षा से लागू होगा, जो वर्ष 2025 में आयोजित की जाएगी, और इसके बाद वर्ष 2026 में टीआरई-5 परीक्षा होगी। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि एसटीईटी परीक्षा टीआरई-5 से पहले आयोजित की जाएगी, जिससे योग्य उम्मीदवारों को समय पर परीक्षा देने का अवसर प्राप्त हो।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार पहले ही मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत लगभग 1.86 करोड़ उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना शुरू कर चुकी है।

नीतीश कुमार सरकार ने इसके साथ ही शुक्रवार को सरकारी स्कूलों में कार्यरत रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय को दोगुना करने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कर्मचारियों ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उनके मेहनत को सम्मान देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

इस निर्णय के तहत अब मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत रसोइयों को प्रति माह 1,650 रुपये के बजाय 3,300 रुपये दिए जाएंगे। रात्रि प्रहरियों का मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। वहीं शारीरिक शिक्षा और स्वास्थ्य अनुदेशकों को अब 16,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा और उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि को 200 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया गया है।

यह सभी घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं जब बिहार में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियाँ शुरू हो चुकी हैं, और ये निर्णय राज्य के शिक्षा क्षेत्र और समाज के अन्य वर्गों को राहत देने के साथ-साथ सियासी रूप से भी अहम माने जा रहे हैं।

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