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1971 की ऐतिहासिक जीत को पीएम मोदी, राष्ट्रपति मुर्मू और राजनाथ सिंह ने किया याद

नई दिल्ली : विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1971 के भारत–पाक युद्ध में अद्वितीय साहस और बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों को नमन किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के अटूट संकल्प और निस्वार्थ सेवा ने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई और उनकी वीरता देशवासियों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि विजय दिवस उन बहादुर सैनिकों को याद करने का दिन है, जिनकी हिम्मत और बलिदान से 1971 में भारत ने ऐतिहासिक विजय हासिल की और बांग्लादेश का निर्माण संभव हुआ। उन्होंने कहा कि यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों की बेमिसाल राष्ट्रभक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य समन्वय को सराहा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विजय दिवस पर भारतीय सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 1971 की निर्णायक जीत के लिए पूरा देश सेना, नौसेना और वायु सेना के सामने गर्व और कृतज्ञता से नतमस्तक है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट तालमेल ने इतिहास रच दिया और भारत के रणनीतिक संकल्प को दुनिया के सामने स्थापित किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का शौर्य, अनुशासन और युद्ध भावना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीरता और आत्मनिर्भरता को किया नमन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी विजय दिवस पर भारत माता के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की भक्ति, साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण की सराहना की।
राष्ट्रपति ने हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने आत्मनिर्भरता, रणनीतिक संकल्प और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रभावी प्रदर्शन किया है, जो देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

1971 का युद्ध और विजय दिवस का महत्व

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 का युद्ध 3 दिसंबर से 16 दिसंबर तक लड़ा गया था। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने ढाका में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद 93,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया गया।
इस ऐतिहासिक विजय के साथ ही पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के रूप में अस्तित्व में आया। तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में भारतीय सेना ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की, जिसे आज भी देश गर्व के साथ याद करता है।

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