Sun. Apr 19th, 2026

कविता: बिहारी जलेवी

 

लेखिका:आशी प्रतिभा 

आत्मविश्वास से भरी जलेवी ,
बोल रही थी इस जल थल में,,,,,,,

नियमों को न हम तोड़ेंगे ,,,,
हम अपनी हिम्मत न छोड़ेंगे ,,,,,,,,,,,

आज फिर से जलेवी मुस्कुराई ,,,,,,,
वास्तविक सच से श्रेष्ठ मिठाई कहलाई

कई लोगों ने जोर लगाया,
जलेवी को न टिकने देंगे

चोर चोर के शोर से ही
इसको नहीं अब बिकने देंगे

पर जलेबी सत्ता पर भारी
गठबंधन की तोड़ी सब पारी

फिर से जलेबी का दौरा आ गया
भगवा रंग से ही कमल खिला गया …

जय जय कार कर रहे झूठों की टोली
जलेवी के आगे फीकी, रह गई हर बोली

जलेवी को भी सौभाग्य मिला ,
मीठा होकर ,सत्य का आभार मिला

@आशी प्रतिभा

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