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झालावाड़ हादसे पर उठे सवाल: पहले भी की गई थी शिकायत, फिर भी नहीं टली त्रासदी

स्कूल हादसा:राजस्थान के झालावाड़ जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया, जब एक सरकारी विद्यालय की जर्जर इमारत के गिरने से सात मासूम बच्चों की जान चली गई और दर्जनों घायल हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब छात्र सुबह की प्रार्थना सभा के लिए एकत्र हुए थे। सबसे दुखद बात यह है कि इस त्रासदी से ठीक पहले कुछ छात्रों ने शिक्षकों को चेतावनी दी थी कि छत से पत्थर गिर रहे हैं, लेकिन कथित रूप से उनकी बात को अनसुना कर दिया गया और उन्हें डाँटकर कक्षा में लौटने को कहा गया।

यह हादसा पिंपलौद के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुआ जहाँ कक्षा 1 से 8 तक के छात्र पढ़ते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार स्कूल की इमारत लंबे समय से जर्जर स्थिति में थी। एक महीने पहले थोड़ी-बहुत मरम्मत की गई थी, लेकिन वह बेहद अपर्याप्त थी। हादसे के बाद मलबे में दबे बच्चों को ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बाहर निकाला और उन्हें तुरंत नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया। इस हादसे में छह साल के कान्हा, बारह वर्षीय पायल, आठ साल का हरीश, बारह वर्षीय प्रियंका, कुंदन, कार्तिक और मीना की मौत हो गई।

घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और पाँच शिक्षकों को आपराधिक लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया। ज़िला कलेक्टर अजय सिंह राठौर ने स्वीकार किया कि इमारत की हालत को लेकर पहले से चेतावनी दी गई थी और इसे एक गंभीर लापरवाही का मामला बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही असुरक्षित भवनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे और इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है।

इस हादसे ने राजनीतिक हलकों में भी उथल-पुथल मचा दी है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस घटना को “हृदय विदारक” बताया और प्रशासन से जवाबदेही की माँग की। वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस त्रासदी को लेकर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक है कि शिकायतों के बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने भाजपा पर “विकसित भारत” के नाम पर केवल प्रचार करने का आरोप लगाया जबकि बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल तक नहीं बनाए जा सके।

राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना पर शोक जताया और कहा कि जर्जर विद्यालयों की शिकायतों को सरकार ने अनदेखा किया जिसके कारण मासूमों की जान चली गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इनमें से अधिकांश बच्चे बहुजन समाज से थे, क्या भाजपा सरकार के लिए उनकी जान की कोई कीमत नहीं है? राहुल गांधी ने दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इस त्रासदी पर गहरा दुख प्रकट किया और कहा कि यह घटना गंभीर लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की और कहा कि ऐसे मामलों में केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह हादसा न सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि कब तक मासूम बच्चे इस तरह की उपेक्षा और लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे। जिन इमारतों में शिक्षा का सपना पनपना चाहिए, वहीं से बच्चों की अर्थियाँ उठ रही हैं—यह किसी भी समाज के लिए गहरी चिंता का विषय है।

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