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नियम उल्लंघन पर रद्द हो सकेगी अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी गई। नई नियमावली के तहत राज्य में मदरसों समेत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता और नवीनीकरण के लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा। यह नियमावली उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 की धारा-19 के तहत बनाई गई है, जिसमें मान्यता, नवीनीकरण, पात्रता, दस्तावेज और अनुपालन संबंधी प्रावधान तय किए गए हैं।

नियमावली में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई है। संस्थानों को मान्यता के लिए निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेजों के साथ शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। मान्यता और नवीनीकरण की वैधता तीन शैक्षणिक वर्षों तक रहेगी। नवीनीकरण के लिए आवेदन अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले करना होगा।

मान्यता प्रक्रिया के दौरान संस्थानों की पात्रता, अल्पसंख्यक हितों की पूर्ति, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति और स्टाफ की योग्यता का परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, प्रबंधन समिति की सूची, भूमि स्वामित्व प्रमाण, बैंक विवरण और स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। संस्थान को अपने अल्पसंख्यक स्वरूप और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने संबंधी घोषणा भी देनी होगी।

नवीनीकरण के लिए संस्थानों को वित्तीय विवरण, बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न, स्टाफ और छात्र नामांकन की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। साथ ही अल्पसंख्यक छात्रों के नामांकन संबंधी घोषणा भी अनिवार्य रहेगी।

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (यूएसएएमई) आवेदन की समीक्षा करेगा और आवश्यकता पड़ने पर निरीक्षण भी करा सकेगा। सभी मानकों को पूरा करने पर मान्यता दी जाएगी, जबकि नियमों का पालन न होने पर आवेदन खारिज किया जा सकेगा। निधियों के दुरुपयोग या नियम उल्लंघन की स्थिति में संस्थान को सुनवाई का अवसर देने के बाद उसकी मान्यता रद्द भी की जा सकेगी।

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