शंकराचार्य का हमला: गाय को राष्ट्रमाता नहीं बना सकती सरकार तो सत्ता में रहने का अधिकार नहीं
आगरा: ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आर्थिक लाभ और अपने धंधे के लिए मुख्यमंत्री ने गाय को भी नहीं बख्शा है, तो आम लोगों को क्या छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर सत्ता में आने वाले लोग आज गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने से बच रहे हैं, जबकि हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम समाज भी इसकी मांग कर रहा है। उनके अनुसार गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने में गर्व महसूस किया जाना चाहिए।
शंकराचार्य गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के तहत धाकरान चौराहे पहुंचे थे। वहां से पालकी में सवार होकर वे नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि मंदिर पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दबाव में आकर गाय को माता कहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे भय की भावना है, जबकि गोरखनाथ जी गाय को माता मानते थे।
उन्होंने कहा कि वे सामान्यतः बिना बुलाए कहीं नहीं जाते, लेकिन गो-रक्षा के लिए मर्यादाओं को छोड़कर गली-गली और गांव-गांव पहुंच रहे हैं। उनका उद्देश्य हिंदुओं को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि समाज के साथ धोखा हो रहा है और इससे सच्चे हिंदुओं को नुकसान होगा। गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है।
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के सभी मुख्यमंत्री और नेता शंकराचार्यों का सम्मान करते हैं। यहां तक कि मुगल और अंग्रेज शासकों ने भी कभी अपमान नहीं किया, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अहंकार में चूर हैं। उन्होंने कहा कि जो सरकार गोवध नहीं रोक सकती और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं दिला सकती, उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने लोगों से गो-रक्षा के मुद्दे पर मतदान करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले हर नेता की परीक्षा होगी। उनके अनुसार अब तक महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ही इस परीक्षा में सफल हुए हैं, क्योंकि उन्होंने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की बात की थी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझाने की जरूरत है कि गाय केवल दूध का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में गाय के नाम पर सहयोग राशि एकत्र कर गोशालाओं में सेवा कार्य करने का सुझाव भी दिया।
धाकरान चौराहे पर आयोजित धर्मसभा में शंकराचार्य को हल भेंट किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि यह भारतीय किसान की ताकत और स्वावलंबन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गाय का बछड़ा बड़ा होकर इसी हल के माध्यम से खेतों में अन्न पैदा करता था और राष्ट्र का पेट भरता था। सभा के दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को गोमाता की रक्षा और उसे राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर दिनेश पचौरी, सुरेश पचौरी, आशीष बल्लभ पचौरी, रानू, नरेश, आदित्य, आयुष, अपूर्व शर्मा, मनीष धाकड़, नवीन शर्मा, मदन मोहन शर्मा, हैप्पी शिवहरे और सागर सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
इस बीच भारतीय मुस्लिम विकास परिषद ने भी गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा का समर्थन किया। परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सैयद इरफान अहमद सलीम ने शंकराचार्य को पत्र सौंपकर कहा कि गाय करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और मुस्लिम समाज भी गाय को माता घोषित किए जाने की मांग का समर्थन करता है।