खड़गे के शुद्धिकरण विवाद से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
देहरादून : उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दौरे के बाद कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ की रस्म किए जाने को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने इस घटना को दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि BJP और RSS की सोच में दलितों के प्रति भेदभाव और नफरत की भावना मौजूद है, जो समय-समय पर अलग-अलग घटनाओं के रूप में सामने आती रहती है।
जयराम रमेश ने कहा कि BJP शासित राज्यों में दलित समुदाय के लोगों के खिलाफ कथित तौर पर होने वाली घटनाओं के पीछे कई बार राजनीतिक संरक्षण की भूमिका दिखाई देती है। उन्होंने उत्तराखंड की BJP सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार उन लोगों को सम्मानित या पुरस्कृत करती है, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रति कथित तौर पर दलित-विरोधी रवैया अपनाया, तो यह हैरानी की बात नहीं होगी।
रमेश ने कहा कि इस तरह की हिम्मत तभी आती है जब संबंधित लोगों को ऊपर से समर्थन मिलने का भरोसा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसा समर्थन नहीं है तो BJP शासित राज्यों में इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों सामने आती हैं। कांग्रेस सांसद ने BJP-RSS की विचारधारा पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दलितों के प्रति भेदभाव की सोच उनकी विचारधारा में गहराई से मौजूद है और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार इसे छिपाने की कोशिश की जाती है।
संविधान और समानता को लेकर भी उठाए सवाल
जयराम रमेश ने केंद्र की BJP सरकार पर संविधान में निहित गरिमा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने समाज के वंचित और दलित वर्गों को अधिकार और सम्मान दिया, जिसकी वजह से दलित समाज से आने वाला व्यक्ति देश की राजनीति में सर्वोच्च पदों तक पहुंच सका।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान ने दलित और वंचित समाज को समानता और अधिकार की ताकत दी। कांग्रेस नेता के मुताबिक, संविधान की इसी व्यवस्था ने समाज के उन वर्गों के लिए राजनीतिक और सामाजिक अवसरों के दरवाजे खोले, जिन्हें लंबे समय तक भेदभाव का सामना करना पड़ा।
रमेश ने कथित घटना को इसी संवैधानिक भावना के खिलाफ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश के एक वरिष्ठ दलित नेता की गरिमा से जुड़ी कथित घटना पर प्रधानमंत्री की ओर से प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कांग्रेस के अनुसार इस मामले में केंद्र की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
राहुल गांधी ने की FIR की मांग
इस पूरे विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी उत्तराखंड की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा। दिल्ली में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कथित ‘शुद्धिकरण’ रस्म में शामिल लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि किसी दलित नेता के दौरे के बाद ‘शुद्धिकरण’ की रस्म किया जाना गंभीर मामला है और यह SC/ST एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि उत्तराखंड में कथित ‘शुद्धिकरण’ की रस्म में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उत्तराखंड में बढ़ा राजनीतिक तापमान
मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ी कथित घटना के बाद कांग्रेस और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस इसे दलित सम्मान, संविधान और सामाजिक समानता से जोड़कर मुद्दा बना रही है, जबकि इस मामले में वास्तविक तथ्यों और कथित घटना में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल कांग्रेस ने मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। वहीं, घटना को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में भी बयानबाजी का दौर जारी है। अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और पुलिस इस पूरे मामले पर क्या कदम उठाती है और कथित घटना की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।