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स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत 253.14 करोड़ रुपये स्वीकृत

देहरादून : आवासन एवं शहरी विकास विभाग, भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं, जिनसे राज्य के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इस योजना के तहत कुल 253.14 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता ढांचे को सुदृढ़ करना और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है।

इस स्वीकृत बजट का एक बड़ा हिस्सा यूज्ड वाटर मैनेजमेंट तथा सीवर निस्तारण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत लगभग 230.83 करोड़ रुपये की राशि 6 नगरों—पिथौरागढ़, टिहरी, किच्छा, पिरान कलियर, पाउली-गुज्जर और लम्बगांव—में सीवरेज व्यवस्था के सुधार एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए खर्च की जाएगी। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जल प्रदूषण को कम करना, स्वच्छ जल की उपलब्धता बढ़ाना और नागरिकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है।

इसके अलावा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट यानी पुराने कूड़े के ढेरों को हटाने और उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इस कार्य हेतु 6.67 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसके माध्यम से पुराने डम्प साइट्स को प्रोसेस कर साफ किया जाएगा। यह पहल न केवल शहरों की सौंदर्य वृद्धि में सहायक होगी, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी कम करेगी।

हरिद्वार नगर में डम्प साइट रिमिडिएशन एक्सीलरेटर प्रोग्राम (DRAP) के तहत अतिरिक्त लीगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए 7.10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना का उद्देश्य हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना है, जिससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर वातावरण मिल सके।

स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत “क्लीन हिली एवं हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव” के तहत भी राज्य को विशेष महत्व दिया गया है। इस योजना के लिए 15.64 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसका उपयोग जन-जागरूकता कार्यक्रमों, पर्यावरण सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्लास्टिक कचरा मुक्त शहर बनाने जैसे नवाचारों में किया जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रहा है, ऐसे में यह पहल स्थानीय निकायों को आधुनिक और टिकाऊ समाधान अपनाने में मदद करेगी।

बैठक के दौरान शहरी विकास निदेशालय के निदेशक विनोद गोस्वामी ने जानकारी दी कि भारत सरकार द्वारा राज्य के सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रस्तावों के स्वीकृत होने से उत्तराखंड में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत चल रही योजनाओं को नई गति मिलेगी और राज्य के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों और नगरीय निकायों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी परियोजनाएं पूरी की जा सकें। इससे न केवल शहरों का समग्र विकास होगा, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

बैठक में शहरी विकास निदेशालय के अपर निदेशक प्रवीण कुमार सहित स्वच्छ भारत मिशन 2.0 से जुड़े अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने विभिन्न परियोजनाओं के तकनीकी और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि योजनाओं के सफल संचालन के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग और स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी बेहद आवश्यक है।

इस प्रकार, केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह बजट और योजनाएं उत्तराखंड के शहरी विकास और स्वच्छता अभियान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से राज्य के शहरों को स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है।

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