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महिला सशक्तीकरण के लिए योजनाओं का बड़ा पैकेज, जेंडर बजट में बढ़ोतरी

देहरादून: भराड़ीसैंण विधानसभा में सोमवार से उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में पांच दिवसीय बजट सत्र की शुरुआत हो गई। राज्य के राजनीतिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार ने राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही सदन में बजट प्रस्तुत किया। सरकार ने इस बजट को संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए समाज के सभी वर्गों के लिए कई योजनाओं का प्रावधान किया है।

बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नंदा गौरा योजना के लिए 220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 47.78 करोड़ रुपये रखे गए हैं। मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के लिए 25 करोड़, महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ और मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के लिए 13.44 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के लिए 15 करोड़, बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि के लिए 8 करोड़ और निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना के लिए 3.76 करोड़ तथा महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के लिए 5 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

सरकार ने प्रसूताओं के लिए ईजा-बोई शगुन योजना के तहत कुल 122 करोड़ रुपये का समग्र प्रावधान किया है। वहीं मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना के लिए 2 करोड़ और चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं। गंगा गाय महिला डेरी विकास योजना के लिए भी 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इस बार सरकार ने जेंडर बजट में भी बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जहां जेंडर बजट 16961.32 करोड़ रुपये था, वहीं इसे बढ़ाकर 19692.02 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। बागेश्वर में जिला चिकित्सालय सहित डोईवाला, हरिद्वार, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, देहरादून, टिहरी और नैनीताल में अस्पतालों और स्वास्थ्य परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के लिए कुल 4252.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि पूंजीगत मद में 195 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत अनुसूचित जातियों के लिए 2400 करोड़ और अनुसूचित जनजातियों के लिए 746.75 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। अल्पसंख्यकों के लिए 98 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अटल आयुष्मान योजना के लिए 600 करोड़ रुपये, खाद्यान्न योजना के लिए 25 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 298.45 करोड़ रुपये रखे गए हैं। ईडब्ल्यूएस आवास के लिए 25 करोड़ रुपये तथा परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा के लिए 42 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट को “संतुलन बजट” बताते हुए कहा कि राज्य सरकार संकल्प से सिद्धि की ओर लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, नवाचार, कौशल विकास और पारदर्शिता के सिद्धांतों के साथ राज्य को नई दिशा देना है। सरकार सबके विकास के लक्ष्य के साथ काम कर रही है और यह बजट उसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार ने इस बजट को SANTULAN की अवधारणा से जोड़ा है, जिसमें समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था जैसे सिद्धांतों को राज्य के विकास की आधारशिला बताया गया है।

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