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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़ा एक्शन, तीन आरोपी हिरासत में

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गुरुवार को एफआईआर दर्ज करा दी। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर सहित आठ लोगों को नामजद किया गया है। ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन ने एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह मुकदमा दर्ज कराया। एफआईआर के बाद आरोपी टिन्नू, लवकुश और अनुकल्प को हिरासत में ले लिया गया है।

हालांकि, इस मामले में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। एफआईआर में महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव का कहीं उल्लेख नहीं है। वहीं, अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाए जाने से जांच का दायरा और बढ़ गया है। नामजद किए गए सभी लोग चढ़ावे की गणना और आभूषणों के रखरखाव से जुड़े कार्यों में शामिल रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनके तहत आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जा सकती है। फैजाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री गिरीश चंद्र तिवारी ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर सकती है।

यह मामला पहली बार छह जून को सामने आया था, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। करीब 20 दिन बाद ट्रस्ट द्वारा एफआईआर दर्ज कराए जाने को जांच प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि अब सभी की नजरें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं, चढ़ावे के प्रबंधन और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। इसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। प्रारंभिक जांच में चढ़ावे की व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई सवाल सामने आए थे, जिसके बाद ट्रस्ट ने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। इस कदम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि यदि किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी।

मामला सामने आने के बाद अयोध्या में कई दिनों से चर्चाओं का दौर जारी था। विपक्षी दलों, संत समाज और विभिन्न संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की थी। ऐसे माहौल में एफआईआर दर्ज होने को जांच प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद अयोध्या के विभिन्न वर्गों ने इस कदम का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान राम के मंदिर से जुड़े किसी भी मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। महंत विवेक आचारी ने कहा कि ट्रस्ट को यह कार्रवाई पहले ही कर देनी चाहिए थी। उनका मानना है कि अब जांच आगे बढ़ने से सच्चाई सामने आएगी।

महंत डॉ. देवेशाचार्य ने उम्मीद जताई कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद पूरे मामले का खुलासा होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि निर्दोष लोगों को भी राहत मिलेगी। व्यापारी पंकज गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट ने सही फैसला लिया है और जो भी दोषी पाए जाएं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही का स्पष्ट संदेश जाए।

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