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आवाज़ों से खेती में क्रांति! पेड़-पौधों को सुनाई जाती है खास धुन

अजब-गज़ब : संगीत को हमेशा से ही मन को सुकून देने वाला माध्यम माना गया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि संगीत पेड़-पौधों को भी पसंद आता है? मध्य प्रदेश के सागर जिले के प्रगतिशील किसान आकाश चौरसिया ने इस बात को साबित कर दिखाया है। उन्होंने एक अनोखा प्रयोग करते हुए दावा किया है कि पेड़-पौधों को संगीत सुनाने से उनका तनाव कम होता है और उनकी उत्पादकता में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होती है।

कैसे आया यह विचार?

गांव जंक्शन से बातचीत में आकाश चौरसिया ने बताया कि जैसे इंसानों को तनाव के समय संगीत शांति देता है, वैसे ही पेड़-पौधे भी ध्वनि और वायु प्रदूषण के कारण तनाव में रहते हैं। उन्होंने महसूस किया कि प्राकृतिक वातावरण में भौंरों की गुनगुनाहट और पक्षियों की आवाजें पौधों को सकारात्मक ऊर्जा देती थीं। उसी विचार को आधार बनाकर उन्होंने पौधों को कृत्रिम संगीत सुनाने का प्रयोग शुरू किया।

कैसे किया गया यह प्रयोग?

आकाश चौरसिया ने पिछले सात से आठ सालों में इस प्रयोग पर काम किया है। उन्होंने फसलों के विभिन्न चरणों पर खास तरह के 5-6 गाने चुने और सुबह 5 से 7 बजे और शाम 6 से 8 बजे तक पेड़-पौधों को नियमित रूप से संगीत सुनाया। उनका कहना है कि इससे पौधों का विकास चक्र तेज हो गया — जो विकास पहले 25 दिनों में होता था, वह अब 17-18 दिनों में हो जाता है।

उत्पादकता में मिली बढ़ोतरी

इस संगीत थेरेपी का सबसे बड़ा फायदा फसलों की पैदावार में देखा गया। आकाश चौरसिया के अनुसार, इस प्रक्रिया से 15 से 25 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन संभव हो पाया है। यह तकनीक खासकर जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है।

क्या कहता है विज्ञान?

हालांकि यह विषय अभी व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों के अधीन है, लेकिन दुनिया भर में कई रिसर्च इस ओर इशारा करती हैं कि पौधे ध्वनि तरंगों के प्रति संवेदनशील होते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि मध्यम आवृत्ति की ध्वनियाँ पौधों के कोशिका विभाजन और वृद्धि को बढ़ावा देती हैं।

एक नई दिशा की ओर कृषि

आकाश चौरसिया का यह अनोखा प्रयोग किसानों के लिए एक नई प्रेरणा बन सकता है। यह दिखाता है कि किस तरह परंपरागत खेती में तकनीक और रचनात्मक सोच को जोड़कर बेहतरीन परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

आप आकाश चौरसिया से गांव जंक्शन की पूरी बातचीत नीचे दिए गए वीडियो में देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव और प्रयोगों के बारे में विस्तार से बताया है।इस तरह का अभिनव प्रयोग देशभर के किसानों को नई सोच और उम्मीद दे सकता है, जहां विज्ञान और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

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